जेम्स वाट का जीवन परिचय, भाप इंजन के अविष्कारक !

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इंसान ने जब पहिए का आविष्कार किया , तो वह उसे अधिक से अधिक गति देने की कोशिश में लगा रहा । जानवरों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों की जगह अगर इंजन लगाकर पहियों को गति दी जाए तो कैसा रहे ? यह प्रश्न वैज्ञानिकों को परेशान करने लगा । मशीनी युग के विकास के साथ , इस प्रश्न को हल करने की कोशिशें भी शुरू हुईं । उस समय तक इंजन का आविष्कार नहीं हुआ था ।

इंजन बनाने का काम यों तो पहली बार थॉमस सेवरी ने सन् 1698 में किया थापर उनका प्रयोग सफल सिद्ध नहीं हुआ । फिर सन् 1705 में थॉमस न्यूकोमेन ने पिस्टन इंजन बनाया था । इसमें ऊपर की तरफ लकड़ी का एक बड़ा लट्ठा लगा कर प्रयोग किया , इसलिए उसने निरंतर अपनी योग्यता बढ़ाई । बड़ा होने पर जेम्स को वैज्ञानिक उपकरण निर्माता के रूप में ग्लासगो यूनिवर्सिटी में नौकरी मिल गई । यहाँ छात्रों को न्यूकोमेन्स के बनाए इंजन का सिद्धांत छात्रों को पढ़ाया जाता था । लेकिन सच्चाई तो यह थी कि यह इंजन ठीक से काम नहीं करता था । जेम्सवाट वहाँ देखा करता था कि प्राध्यापकमहोदय किस तरह से परेशान होकर पढ़ाते हैं । 

जेम्स वाट का जीवन परिचय, भाप इंजन के अविष्कारक !
जेम्स वाट का जीवन परिचय

जेम्स वाट ने भाप का इंजन कैसे बनाया? 

एक दिन की बात है । सभी छात्र चले गए तो जेम्स ने प्राध्यापक महोदय से कहा " ये इंजन ठीक नहीं है । फिर भी आप इसके बारे में पढ़ाते हैं , क्यों ? " इसलिए कि इससे अच्छा इंजन अभी तक नहीं बना है । " " तो इसे ही ठीक करा लीजिए । " जेम्सवाट ने कहा । " तुम इसे ठीक कर सकते हो ? " प्राध्यापक ने पूछा । " आप कहें तो ठीक कर दूंगा । " " हाँ .... हाँ .... मेरी अनुमति है । " जेम्सवाट ने उस इंजन को ठीक करने के लिए , उसकी बनावट पर पूरा अध्ययन किया । फिर उसे ठीक करने लगा । इस दौरान उसने न केवल इंजन की खराबियों को , बल्कि उसकी कमियों को भी समझा। 

उसे लगा कि वह खुद भी एक इंजन बना सकता है और वह अपने काम में जुट गया । जेम्सवाट का इंजन जब बनकर तैयार हुआ तो लोग उसकी प्रतिभा को देखकर आश्चर्यचकित रह गए । जेम्सवाट का इंजन , न्यूकोमेन के इंजन से दुगनी ताकतवाला था । लेकिन यह तो शुरुआत थी । जेम्सवाट भी उस इंजन से संतुष्ट न था । दरअसल अभी तक इंजन का पिस्टन आगे - पीछे घूमता था । जेम्सवाट चाहता था कि पिस्टन गोलाई में भी घूमे ।

वह अपनी कोशिश में जुटा रहा । आखिर एक दिन उसने गोलाई में घूमने वाला पिस्टन भी बना लिया । अब तक इंजन का इस्तेमाल खानों के अंदर भरा पानी निकालने के लिए ही हो रहा था । जेम्सवाट के नये इंजन से पहिया भी घूमने लगा और फिर उससे जुड़े सारे उपकरण घूमने लगे । जेम्सवाट के इस आविष्कार ने तो घूम मचा दी । जिन मशीनों को पहिया घुमाकर चलाया जाता था या जिनमें पहियों का इस्तेमाल होता था उन्हें - इस नए इंजन से आसानी से चलाया जाने लगा । 

मशीनी दुनिया के लिए जेम्सवाट का इंजन एक वरदान सिद्ध हुआ । कारण यह था कि पहले उन मशीनों को मानव शक्ति से चलाया जाता था । उस शक्ति की जगह इंजन ने ले ली । इससे एक तो मानव शक्ति की बचत हुई और वह किसी और काम में आई । दूसरा लाभ यह भी हुआ कि मानव शक्ति चालित इंजन से जितना माल बनता था , जेम्सवाट का इंजन लग जाने से कई गुना ज्यादा बनने लगा । यह घटना सन् 1769 की है । जेम्सवाट ने शीघ्र ही अपने इंजन का डिजाइन पेटेंट करा लिया। फिर तो उसके इंजन की माँग बढ़ने लगी। 

धीरे - धीरे जेम्सवाट के इंजन के कारण ब्रिटेन की भूमि खेतों की बजाय कारखानों में बदल गई । फिर तो इंजन से चलने वाली अनेक मशीनें बनाई गईं । बड़े - बड़े कारखाने खुलने लगे । किसानों ने खेतों में काम करना छोड़कर , कारखानों में काम करना शुरू कर दिया । इसके बाद स्टीम इंजन की ताकत के इस्तेमाल से रेलगाड़ी बनी , मोटर बनी , जहाज बने । लोग दूर देशों की यात्रा करने लगे । एक जगह का माल दूसरी जगह जाने लगा । व्यापार बढ़ने लगा । नए - नए उद्योग खुले । 

इन सबसे दुनिया में एक नई शक्ति तथा नई गति आ गई । इंसान को भरोसा हो गया कि उसे प्रकृति की शक्ति पर ही निर्भर रहने की जरूरत नहीं है , वह खुद भी शक्ति का निर्माण कर सकता है । इस तरह जेम्सवाट के स्टीम इंजन ने केवल ब्रिटेन ही नहीं , यूरोप और अमेरिका के देशों में भी क्रांति ला दी । लोगों ने और भी अच्छे इंजन बनाए । वे और भी ज्यादा शक्ति का उत्पादन करते थे । 

इससे बड़ी - बड़ी भारी मशीनें बनीं उनके कल - पुर्जे बने , औजार बने । सारी दुनिया में उद्योगों का विकास हुआ और औद्योगिक क्रांति आ गई । वास्तव में पहिए को ज्यादा ताकत और शक्ति से चलाने की कोशिश का ही यह फल था कि दुनिया भर में औद्योगिक क्रांति आई । पहिए से रेलगाड़ी चली , मोटरगाड़ी चली , हवाई जहाज को उड़ाने के लिए भी पहियों का सहारा लिया गया और पहियों को शक्ति देने वाले इंजन का निर्माण किया जेम्सवाट ने इसी कारण आधुनिक विज्ञान जगत् में उनके योगदान को क्रांतिकारी परिवर्तन कहा जाता है ।

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